📌 परिचय:
“Iran-Israel Conflict” यानी ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ता तनाव न सिर्फ मध्य पूर्व के देशों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसका असर भारत जैसे देशों पर भी दिख रहा है। खासकर उन भारतीय छात्रों पर, जो पढ़ाई के लिए ईरान में रह रहे थे। ऐसे ही समय में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंधु’ शुरू किया – एक मानवीय कदम, जिसने 110 भारतीय छात्रों की जान बचाई।
🔥 ईरान-इज़राइल संघर्ष की पृष्ठभूमि: Iran-Israel Conflict
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यह संघर्ष वर्षों पुराना है, लेकिन हाल के दिनों में यह और अधिक गंभीर होता जा रहा है।
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इज़राइल और ईरान एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य बयानबाज़ी, ड्रोन हमले और मिसाइल परीक्षण कर रहे हैं।
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इस क्षेत्र में अशांति से सीरिया, इराक और लेबनान जैसे देश भी प्रभावित हैं।
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भारत, जो कि एक शांतिप्रिय राष्ट्र है, इस पूरे संघर्ष में तटस्थ है, लेकिन वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है।
✈️ ऑपरेशन सिंधु: भारत की एक साहसी पहल(Iran-Israel Conflict)
जब ईरान में हालात बिगड़ने लगे, भारतीय छात्रों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई। ऐसे में भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंधु की शुरुआत की।
मुख्य बातें:
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17 जून 2025: भारत सरकार ने छात्रों को ईरान की राजधानी तेहरान से निकालने का निर्णय लिया।
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सड़क मार्ग से सफर: 110 छात्रों को बसों के ज़रिए उत्तरी ईरान से आर्मीनिया की राजधानी येरवेन पहुँचाया गया।
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18 जून: विशेष फ्लाइट से सभी छात्र येरवेन से दिल्ली के लिए रवाना हुए।
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19 जून, सुबह: छात्रों का पहला जत्था सुरक्षित दिल्ली पहुंचा।
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🧑🎓 छात्रों की ज़ुबानी: जज़्बात और राहत के पल(Iran-Israel Conflict)
1. ✨ “मैं खुश हूं कि भारत लौट आया”
उर्मिया यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने बताया,
“हमने मिसाइलें और ड्रोन देखे… डर लग रहा था। लेकिन अब भारत लौट कर बहुत अच्छा लग रहा है। भारत सरकार का धन्यवाद।”
2. ✨ “रात में मिसाइलों की आवाज़ आती थी”
एक अन्य छात्र यासिर गफ्फार ने कहा,
“हमने रात में मिसाइलों की आवाज़ सुनी… पर अब मैं भारत में हूं, सुरक्षित हूं। जब हालात सुधरेंगे, वापस पढ़ाई के लिए जाऊंगा।”
3. ✨ “परिवार से मिलकर बहुत खुशी हो रही है”
“शब्दों में नहीं बता सकती कि मैं कितनी खुश हूं। ईरान के हालात बहुत खराब हैं। वहां के लोग भी हम जैसे हैं… मासूम बच्चे तक डर में जी रहे हैं।”
🇮🇳 भारतीय सरकार की भूमिका-Iran-Israel Conflict
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विदेश मंत्रालय (MEA) ने हालात को समझते हुए तुरंत कार्रवाई की।
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ईरान और आर्मीनिया में स्थित भारतीय मिशनों ने मिलकर छात्रों की सुरक्षा का इंतज़ाम किया।
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जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को धन्यवाद दिया।
विदेश मंत्रालय का बयान:
“ईरान-इज़राइल संघर्ष की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए समय रहते कदम उठाए गए।”
📷 फोटो की कल्पना: Iran-Israel Conflict
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दिल्ली एयरपोर्ट पर थके लेकिन मुस्कुराते चेहरे
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भारतीय झंडा लहराते छात्र
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माता-पिता की आंखों में राहत के आँसू
💡 Iran-Israel Conflict से जुड़ी 10 अहम FAQs
1. Iran-Israel Conflict क्या है?
ईरान और इज़राइल के बीच लम्बे समय से राजनीतिक और सैन्य तनाव है। यह संघर्ष धार्मिक, सामरिक और राजनीतिक कारणों से है।
2. यह संघर्ष हाल में क्यों बढ़ा?
ड्रोन हमले, इजराइली सैन्य कार्रवाई और ईरानी मिसाइल परीक्षणों ने तनाव को बढ़ा दिया। इसके चलते सुरक्षा हालात बिगड़ गए।
3. इसका भारतीय छात्रों पर क्या असर पड़ा?
ईरान में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र डरे हुए थे। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच उनकी पढ़ाई और जान दोनों पर संकट था।
4. भारत सरकार ने क्या कदम उठाए?
‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत छात्रों को पहले सड़क मार्ग से आर्मीनिया भेजा गया और फिर फ्लाइट से भारत लाया गया।
5. कितने छात्रों को निकाला गया?
पहले चरण में 110 छात्रों को निकाला गया। बाकी छात्रों के लिए भी योजना तैयार है।
6. क्या सभी छात्र जम्मू-कश्मीर से थे?
अधिकतर छात्र जम्मू-कश्मीर से थे। ये छात्र MBBS की पढ़ाई कर रहे थे।
7. क्या छात्र वापसी के बाद फिर ईरान जाएंगे?
कई छात्रों ने बताया कि जैसे ही हालात सुधरेंगे, वे वापस पढ़ाई के लिए जाएंगे।
8. क्या ईरान के सभी इलाकों में हालात खराब हैं?
नहीं, कुछ इलाकों जैसे उर्मिया में हालात थोड़े सामान्य थे, लेकिन पूरे देश में डर का माहौल है।
9. ऑपरेशन सिंधु को लेकर लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?
लोगों ने भारत सरकार की तेज़ और सुरक्षित पहल की सराहना की है। छात्रों और उनके परिवारों ने धन्यवाद जताया है।
10. भारत के बाकी नागरिकों का क्या होगा?
भारत सरकार लगातार स्थिति पर नज़र रखे हुए है और सभी नागरिकों को सुरक्षित निकालने की योजना बना रही है।
🌍 निष्कर्ष:Iran-Israel Conflict
ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध जैसे हालात दुनिया भर के लोगों के लिए चिंता का विषय हैं। लेकिन इस बीच भारत सरकार की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंधु’ के ज़रिए यह साबित करती है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानती है। यह कहानी सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि मानवता और सरकार के कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की मिसाल है।
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