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Ranya Rao: गोल्ड स्मगलिंग मामले में फंसी अभिनेत्री को पिछली सरकार में स्टील प्लांट के लिए मिली जमीन

गोल्ड स्मगलिंग मामले में आरोपी Ranya Rao को पिछली सरकार के दौरान स्टील प्लांट के लिए आवंटित हुई ज़मीन: KIADB

बेंगलुरु: कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड (KIADB) ने रविवार को जानकारी दी कि कन्नड़ अभिनेत्री हर्षवर्धिनी रण्या उर्फ Ranya Rao, जो दुबई से सोने की तस्करी के मामले में गिरफ्तार की गई हैं, को पिछली सरकार के कार्यकाल में स्टील प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन आवंटित की गई थी। यह जमीन उन्हें फरवरी 2023 में आवंटित की गई थी।

Ranya Rao

KIADB की इस घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, खबरें आई थीं कि Ranya Rao से जुड़े एक कंपनी को KIADB ने 12 एकड़ औद्योगिक जमीन आवंटित की थी। मामले को राजनीतिक रंग पकड़ता देख, राज्य के मध्यम और बड़े उद्योग मंत्री एम. बी. पाटिल के कार्यालय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और सरकार की ओर से आधिकारिक जानकारी साझा की।

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Ranya Rao: कैसे हुआ ज़मीन आवंटन?

राज्य सरकार द्वारा साझा किए गए दस्तावेज़ों के अनुसार, “M/s क्षीरोदा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड” नामक कंपनी को सिरा औद्योगिक क्षेत्र में “स्टील उत्पाद – टीएमटी बार, रॉड्स और अन्य संबंधित उत्पादों” के निर्माण के लिए इकाई स्थापित करने की अनुमति दी गई थी। Ranya Rao

Ranya Rao: हालांकि, इस मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने इस कंपनी की पृष्ठभूमि की ठीक से जांच की थी? क्या इस आवंटन में कोई अनियमितता थी?

Ranya Rao और गोल्ड स्मगलिंग मामला

Ranya Rao एक कन्नड़ फिल्म अभिनेत्री हैं, जिन्हें हाल ही में दुबई से भारत में सोने की तस्करी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में कस्टम विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गहन जांच की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Ranya Rao के पास से बड़ी मात्रा में अवैध सोना बरामद हुआ था, जिसे वे छिपाकर ला रही थीं।

इस गिरफ्तारी के बाद यह खुलासा हुआ कि अभिनेत्री से जुड़ी कंपनी को KIADB ने औद्योगिक भूमि आवंटित की थी।

मामले का राजनीतिक पहलू Ranya Rao

इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, क्योंकि विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं कि आखिर इतनी संवेदनशील जानकारी को छिपाने की कोशिश क्यों की गई? क्या सरकार को इस कंपनी से जुड़ी जानकारी पहले से थी? यदि हां, तो क्या इस कंपनी को विशेष लाभ दिया गया?

दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया कि यह आवंटन कानूनी प्रक्रिया के तहत हुआ था और इसमें कोई अनियमितता नहीं थी। KIADB के अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी औद्योगिक भूमि आवंटन से पहले पूरी प्रक्रिया को नियमों के तहत जांचा जाता है।

Ranya Rao औद्योगिक विकास बनाम अनियमितताएँ

राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार नए निवेशकों को आकर्षित कर रही है। कर्नाटक में विशेष रूप से स्टील उद्योग में बड़े पैमाने पर निवेश देखा गया है। हालांकि, जब किसी निवेश से जुड़ा नाम विवादों में आ जाता है, तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठने लगते हैं।

Ranya Rao मामले के बाद यह जरूरी हो गया है कि सरकार औद्योगिक भूमि आवंटन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाए और भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता से बचने के लिए कड़ी जांच सुनिश्चित करे।

Ranya Rao का क्या होगा आगे?

अब जबकि यह मामला सुर्खियों में आ चुका है, संभावना है कि सरकार इसकी गहन जांच करवाएगी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियाँ भी यह जांच सकती हैं कि क्या इस भूमि आवंटन में किसी प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ था या नहीं।

इसके अलावा, Ranya Rao पर चल रहे सोने की तस्करी के मामले में भी जल्द ही नए खुलासे हो सकते हैं। अगर इस मामले में उद्योगपतियों, नौकरशाहों या नेताओं की संलिप्तता पाई जाती है, तो यह कर्नाटक सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर सकता है।

निष्कर्ष

Ranya Rao का नाम पहले सिर्फ एक अभिनेत्री के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब यह एक गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ चुका है। स्टील प्लांट के लिए आवंटित भूमि और सोने की तस्करी मामले के बीच का संबंध कितना गहरा है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

राजनीतिक गलियारों में इस मामले की गूंज तेज़ है और जनता भी यह जानना चाहती है कि क्या इस पूरे प्रकरण में कोई बड़ा घोटाला छिपा हुआ है या फिर यह केवल एक संयोग भर है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले को कैसे संभालती हैं और क्या भविष्य में औद्योगिक भूमि आवंटन प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

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